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सीईओ दफ्तर घेराव मामले में बढ़ी कानूनी तपिश

टीएमसी के दो पार्षदों को लालबाजार का नोटिस

03 Apr 2026

सीईओ दफ्तर घेराव मामले में बढ़ी कानूनी तपिश

कोलकाता। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच कोलकाता के स्ट्रैंड रोड स्थित मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर हुए बवाल ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। कोलकाता पुलिस के हेयर स्ट्रीट थाने ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तृणमूल के दो प्रमुख पार्षदों, वार्ड संख्या 32 के शांतिरंजन कुंडु और वार्ड संख्या 36 के सचिन सिंह को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। इन दोनों नेताओं को तय समय सीमा के भीतर थाने में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने और पूछताछ का सामना करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर ली थी, जिसमें इन दोनों पार्षदों समेत कुल छह लोगों को नामजद किया गया है। इस पूरे विवाद की जड़ नए मतदाताओं के नाम जोडऩे के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग से जुड़ी है। 
आरोप है कि 31 मार्च और 1 अप्रैल की मध्यरात्रि को तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों और पार्षदों ने चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर भारी हंगामा और प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि भारतीय जनता पार्टी बाहरी लोगों के नाम बंगाल की मतदाता सूची में अवैध तरीके से दर्ज कराने के लिए बड़ी मात्रा में फॉर्म-6 जमा कर रही है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि एक ही दिन में हजारों की संख्या में आवेदन जमा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में धांधली की कोशिश है, जिसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई थी। 
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, आरोपियों पर प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से भीड़ इक_ा करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस के बार-बार अनुरोध के बावजूद इलाके से हटने से इनकार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आधी रात को हुए इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ नारेबाजी भी की गई थी, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी। स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस को भारी बैरिकेडिंग करनी पड़ी थी और सुरक्षा के मद्देनजर अब इलाके में धारा 163 (पूर्व में 144) का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। इस घटना पर निर्वाचन आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे आधिकारिक कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया है। आयोग के कड़े रुख के बाद ही कोलकाता पुलिस ने अपनी जांच तेज की और पार्षदों को नोटिस थमाया है। दूसरी ओर, इस कार्रवाई ने राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। 
तृणमूल  इसे विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि भाजपा इसे चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की हताशापूर्ण चाल कह रही है। फिलहाल, हेयर स्ट्रीट थाना इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहा है कि क्या इस घेराव के पीछे कोई सोची-समझी योजना थी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये पार्षद पुलिस के सामने क्या स्पष्टीकरण देते हैं और आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई क्या मोड़ लेती है। 

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